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mahabharat 1.189.16: कर्ण ने कहा- हे ब्राह्मण! युद्ध में तुम्हारे पराक्रम से मैं (अत्यंत) संतुष्ट हूँ। तुममें थकान या उदासी का कोई चिह्न नहीं है और ऐसा प्रतीत होता है मानो तुमने समस्त अस्त्र-शस्त्रों पर विजय प्राप्त कर उन्हें अपने वश में कर लिया है। (तुम्हारी सफलता देखकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ)॥16॥   |   mahabharat अध्याय 1.189: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कर्ण तथा शल्यकी पराजय और द्रौपदीसहित भीम-अर्जुनका अपने डेरेपर जाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 189: अर्जुन और भीमसेनके द्वारा कर्ण तथा शल्यकी पराजय और द्रौपदीसहित भीम-अर्जुनका अपने डेरेपर जाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.189.16 
कर्ण उवाच
तुष्यामि ते विप्रमुख्य भुजवीर्यस्य संयुगे।
अविषादस्य चैवास्य शस्त्रास्त्रविजयस्य च॥ १६॥
 
 
अनुवाद
कर्ण ने कहा- हे ब्राह्मण! युद्ध में तुम्हारे पराक्रम से मैं (अत्यंत) संतुष्ट हूँ। तुममें थकान या उदासी का कोई चिह्न नहीं है और ऐसा प्रतीत होता है मानो तुमने समस्त अस्त्र-शस्त्रों पर विजय प्राप्त कर उन्हें अपने वश में कर लिया है। (तुम्हारी सफलता देखकर मैं बहुत प्रसन्न हूँ)॥16॥
 
Karna said— O Brahmin! I am (very) satisfied with your strength in the war. There is no sign of fatigue or sadness in you and it seems as if you have conquered all the weapons and weapons and have brought them under your control. (I am very happy to see your success)॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)