Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.186.5: कामदेव के बाणों के प्रहार से उसके शरीर के सभी अंग निरंतर पीड़ा में थे। उसका मन केवल द्रौपदी पर ही लगा हुआ था। वे सभी राजा जो द्रुपद की पुत्री को लुभाने के लिए युद्धभूमि में आए थे, अपने मित्र राजाओं से ईर्ष्या करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.186: राजाओंका लक्ष्यवेधके लिये उद्योग और असफल होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 186: राजाओंका लक्ष्यवेधके लिये उद्योग और असफल होना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.186.5 
कन्दर्पबाणाभिनिपीडिताङ्गा:
कृष्णागतैस्ते हृदयैर्नरेन्द्रा:।
रङ्गावतीर्णा द्रुपदात्मजार्थं
द्वेषं प्रचक्रु: सुहृदोऽपि तत्र॥ ५॥
 
 
अनुवाद
कामदेव के बाणों के प्रहार से उसके शरीर के सभी अंग निरंतर पीड़ा में थे। उसका मन केवल द्रौपदी पर ही लगा हुआ था। वे सभी राजा जो द्रुपद की पुत्री को लुभाने के लिए युद्धभूमि में आए थे, अपने मित्र राजाओं से ईर्ष्या करने लगे।
 
All his body parts were in constant pain due to the blows of Kamadeva's arrows. His mind was only on Draupadi. All those kings who had come to the battlefield to woo Drupada's daughter started getting jealous of their friend kings. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)