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mahabharat 1.186.22: जब अग्नि, चन्द्रमा और सूर्य से भी अधिक तेजस्वी सूर्यपुत्र कर्ण द्रौपदी पर मोहित होकर लक्ष्य भेदन का संकल्प करके खड़ा हुआ, तब उसे देखकर महाधनुर्धर पाण्डवों को विश्वास हो गया कि अब वह इस उत्तम लक्ष्य को भेदकर पृथ्वी पर गिरा देगा॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 1.186: राजाओंका लक्ष्यवेधके लिये उद्योग और असफल होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 186: राजाओंका लक्ष्यवेधके लिये उद्योग और असफल होना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.186.22 
दृष्ट्वा सूतं मेनिरे पाण्डुपुत्रा
भित्त्वा नीतं लक्ष्यवरं धरायाम्।
धनुर्धरा रागकृतप्रतिज्ञ-
मत्यग्निसोमार्कमथार्कपुत्रम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जब अग्नि, चन्द्रमा और सूर्य से भी अधिक तेजस्वी सूर्यपुत्र कर्ण द्रौपदी पर मोहित होकर लक्ष्य भेदन का संकल्प करके खड़ा हुआ, तब उसे देखकर महाधनुर्धर पाण्डवों को विश्वास हो गया कि अब वह इस उत्तम लक्ष्य को भेदकर पृथ्वी पर गिरा देगा॥ 22॥
 
When the son of Sun, Karna, who was more radiant than the fire, the moon and the sun, being infatuated with Draupadi, stood up with the resolve to pierce the target, the great archer Pandavas, on seeing him, were confident that now he would pierce this excellent target and bring it down to the earth.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)