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mahabharat 1.185.5-15: इनके अतिरिक्त असंख्य महाबली क्षत्रिय और श्रेष्ठ भूमिपाल यहाँ आये हैं। वहाँ देखो, गांधारराज सुबल के पुत्र शकुनि, वृषक और बृहद्बल बैठे हैं। गांधारराज के ये सभी पुत्र यहाँ आये हैं। अश्वत्थामा और भोज - ये दोनों ही अत्यंत तेजस्वी और समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ हैं तथा तुम्हारे लिए आभूषणों और वस्त्रों से सुसज्जित होकर यहाँ आये हैं। राजा बृहंत, मणिमान, दंडधर, सहदेव, जयत्सेन, राजा मेघसंध, राजा विराट अपने दोनों पुत्रों शंख और उत्तर के साथ, सुशर्मा, वृद्धक्षेम के पुत्र, राजा सेनाबिंदु, सुकेतु और उनके पुत्र सुवर्च, सुचित्र, सुकुमार, वृक, सत्यधृति, सूर्यध्वज, रोचमान, नील, चित्रायुध, अंशुमान, चेकितान, महाबली श्रेणिमान, समुद्रसेन के। प्रतापी पुत्र चंद्रसेन, जलसंध, विदंद और उनके पुत्र दंड, पौंड्रक वासुदेव, पराक्रमी भगदत्त, कलिंगनरेश, ताम्रलिप्तनरेश, पाटन के राजा, वीर मद्रराज शल्य अपने दो पुत्रों रुक्मांगद और रुक्मरथ के साथ, कुरुवंशी सोमदत्त और उनके तीन वीर पुत्र भूरि, भूरिश्रवा और शाल, कम्बोज मूल निवासी सुदक्षिण, पुरुवंशी दुर्गधन्वा॥ 5–15.   |   mahabharat अध्याय 1.185: धृष्टद्युम्नका द्रौपदीको स्वयंवरमें आये हुए राजाओंका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 185: धृष्टद्युम्नका द्रौपदीको स्वयंवरमें आये हुए राजाओंका परिचय देना  »  श्लोक 5-15
 
 
श्लोक  1.185.5-15 
असंख्याता महात्मान: पार्थिवा: क्षत्रियर्षभा:।
शकुनि: सौबलश्चैव वृषकोऽथ बृहद्‍बल:॥ ५॥
एते गान्धारराजस्य सुता: सर्वे समागता:।
अश्वत्थामा च भोजश्च सर्वशस्त्रभृतां वरौ॥ ६॥
समवेतौ महात्मानौ त्वदर्थे समलंकृतौ।
बृहन्तो मणिमांश्चैव दण्डधारश्च पार्थिव:॥ ७॥
सहदेवजयत्सेनौ मेघसंधिश्च पार्थिव:।
विराट: सह पुत्राभ्यां शङ्खेनैवोत्तरेण च॥ ८॥
वार्द्धक्षेमि: सुशर्मा च सेनाबिन्दुश्च पार्थिव:।
सुकेतु: सह पुत्रेण सुनाम्ना च सुवर्चसा॥ ९॥
सुचित्र: सुकुमारश्च वृक: सत्यधृतिस्तथा।
सूर्यध्वजो रोचमानो नीलश्चित्रायुधस्तथा॥ १०॥
अंशुमांश्चेकितानश्च श्रेणिमांश्च महाबल:।
समुद्रसेनपुत्रश्च चन्द्रसेन: प्रतापवान्॥ ११॥
जलसंध: पितापुत्रौ विदण्डो दण्ड एव च।
पौण्ड्रको वासुदेवश्च भगदत्तश्च वीर्यवान्॥ १२॥
कालिङ्गस्ताम्रलिप्तश्च पत्तनाधिपतिस्तथा।
मद्रराजस्तथा शल्य: सहपुत्रो महारथ:॥ १३॥
रुक्माङ्गदेन वीरेण तथा रुक्मरथेन च।
कौरव्य: सोमदत्तश्च पुत्राश्चास्य महारथा:॥ १४॥
समवेतास्त्रय: शूरा भूरिर्भूरिश्रवा: शल:।
सुदक्षिणश्च काम्बोजो दृढधन्वा च पौरव:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इनके अतिरिक्त असंख्य महाबली क्षत्रिय और श्रेष्ठ भूमिपाल यहाँ आये हैं। वहाँ देखो, गांधारराज सुबल के पुत्र शकुनि, वृषक और बृहद्बल बैठे हैं। गांधारराज के ये सभी पुत्र यहाँ आये हैं। अश्वत्थामा और भोज - ये दोनों ही अत्यंत तेजस्वी और समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ हैं तथा तुम्हारे लिए आभूषणों और वस्त्रों से सुसज्जित होकर यहाँ आये हैं। राजा बृहंत, मणिमान, दंडधर, सहदेव, जयत्सेन, राजा मेघसंध, राजा विराट अपने दोनों पुत्रों शंख और उत्तर के साथ, सुशर्मा, वृद्धक्षेम के पुत्र, राजा सेनाबिंदु, सुकेतु और उनके पुत्र सुवर्च, सुचित्र, सुकुमार, वृक, सत्यधृति, सूर्यध्वज, रोचमान, नील, चित्रायुध, अंशुमान, चेकितान, महाबली श्रेणिमान, समुद्रसेन के। प्रतापी पुत्र चंद्रसेन, जलसंध, विदंद और उनके पुत्र दंड, पौंड्रक वासुदेव, पराक्रमी भगदत्त, कलिंगनरेश, ताम्रलिप्तनरेश, पाटन के राजा, वीर मद्रराज शल्य अपने दो पुत्रों रुक्मांगद और रुक्मरथ के साथ, कुरुवंशी सोमदत्त और उनके तीन वीर पुत्र भूरि, भूरिश्रवा और शाल, कम्बोज मूल निवासी सुदक्षिण, पुरुवंशी दुर्गधन्वा॥ 5–15.
 
Apart from these, innumerable great Kshatriyas and the greatest Bhumipals have come here. Look there, Shakuni, Vrishak and Brihadbal, sons of Gandhara King Subal are sitting there. All these sons of Gandhara King have come here. Ashwatthama and Bhoj - both of them are very radiant and the best among all the weapon holders and have come here adorned with jewelry and clothes for you. King Brihant, Maniman, Dandhadhar, Sahadeva, Jayatsen, King Meghasandhi, King Virat with his two sons Shankha and Uttar, Susharma, son of Vridhakshema, King Senabindu, Suketu and his son Suvarcha, Suchitra, Sukumar, Vrik, Satyadhruthi, Suryadhwaj, Rochman, Neel, Chitrayudh, Anshuman, Chekitan, Mahabali Shreniman, Samudrasena's illustrious sons Chandrasen, Jalsandha, Vidanda and their sons Danda, Paundrak Vasudev, the mighty Bhagadatta, Kalinganaresh, Tamraliptanaresh, the king of Patan, the brave Madraraja Shalya with his two sons Rukmangad and Rukmarath, the Kuruvanshi Somdutta and his three brave sons Bhuri, Bhurishrava and Shala, the Kamboja native Sudakshin, Puruvanshi Durgdhaanva॥ 5–15.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)