श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 185: धृष्टद्युम्नका द्रौपदीको स्वयंवरमें आये हुए राजाओंका परिचय देना  »  श्लोक 21-24
 
 
श्लोक  1.185.21-24 
भागीरथो बृहत्क्षत्र: सैन्धवश्च जयद्रथ:।
बृहद्रथो बाह्लिकश्च श्रुतायुश्च महारथ:॥ २१॥
उलूक: कैतवो राजा चित्राङ्गदशुभाङ्गदौ।
वत्सराजश्च मतिमान् कोसलाधिपतिस्तथा॥ २२॥
शिशुपालश्च विक्रान्तो जरासंधस्तथैव च।
एते चान्ये च बहवो नानाजनपदेश्वरा:॥ २३॥
त्वदर्थमागता भद्रे क्षत्रिया: प्रथिता भुवि।
एते भेत्स्यन्ति विक्रान्तास्त्वदर्थे लक्ष्यमुत्तमम्।
विध्येत य इदं लक्ष्यं वरयेथा: शुभेऽद्य तम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भगीरथ वंश के बृहत्क्षत्र, सिन्धुराज जयद्रथ, बृहद्रथ, बाह्लीक, महारथी श्रुतायु, उलूक, राजा कैतव, चित्रांगद, शुभांगद, बुद्धिमान वत्सराज, कोसलनरेश, पराक्रमी शिशुपाल और जरासंध - ये तथा विश्व के अनेक प्रसिद्ध क्षत्रिय योद्धा, अनेक जनपदों के शासक आपके लिये यहाँ आये हैं। भद्रे! ये शक्तिशाली राजा तुम्हें पाने के उद्देश्य से इस महान लक्ष्य को भेद देंगे। आपको कामयाबी मिले! आज आप इस लक्ष्य को भेदने वाले को चुनेंगे. 21-24॥
 
Bhagiratha dynasty's Brihatkshatra, Sindhuraj Jayadratha, Brihadrath, Bahlika, Maharathi Shrutayu, Uluk, King Kaitava, Chitrangad, Shubhangad, wise Vatsaraj, Kosalanresh, mighty Shishupala and Jarasandha - these and many other famous Kshatriya warriors of the world, rulers of many districts have come here for you. Bhadre! These mighty kings will pierce this noble target with the aim of getting you. Good luck! Today you will select the one who pierces this target. 21-24॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि स्वयंवरपर्वणि राजनामकीर्तने पञ्चाशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत, आदिपर्वके अन्तर्गत स्वयंवरपर्वमें राजाओंके नामका परिचयविषयक एक सौ पचासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८५॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)