श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 182: पाण्डवोंका धौम्यको अपना पुरोहित बनाना  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  1.182.4-5 
त्वय्येव तावत् तिष्ठन्तु हया गन्धर्वसत्तम।
कार्यकाले ग्रहीष्याम: स्वस्ति तेऽस्त्विति चाब्रवीत्॥ ४॥
तेऽन्योन्यमभिसम्पूज्य गन्धर्व: पाण्डवाश्च ह।
रम्याद् भागीरथीतीराद् यथाकामं प्रतस्थिरे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'गन्धर्वप्रवर! आपके दिए हुए घोड़े अभी आपके पास ही रहें। जब हमें उनकी आवश्यकता होगी, तब हम उन्हें आपसे वापस ले लेंगे। आपका कल्याण हो।' अर्जुन के ऐसा कहने पर गन्धर्वराज और पाण्डवों ने एक-दूसरे का बहुत ही गर्मजोशी से स्वागत किया। फिर पाण्डव अपनी इच्छानुसार गंगा के सुन्दर तट से चले गए। ॥4-5॥
 
'Gandharvapravar! The horses you have given should remain with you for now. We will take them back from you when we need them. May you be blessed.' After Arjuna finished saying this, the Gandharvaraj and the Pandavas welcomed each other very warmly. Then the Pandavas left the beautiful banks of the Ganga as per their wish. ॥ 4-5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)