श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 181: राजा कल्माषपादको ब्राह्मणी आंगिरसीका शाप  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.181.25 
न हि सस्मार स नृपस्तं शापं काममोहित:।
देव्या: सोऽथ वच: श्रुत्वा सम्भ्रान्तो नृपसत्तम:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजा कल्माषपाद काम से मोहित हो रहे थे। इसलिए उन्हें शाप की याद नहीं रही। रानी मदयन्ती के वचन सुनकर नृपश्रोष्ठजी को बड़ा मोह हुआ ॥25॥
 
King Kalmashpad was getting fascinated by lust. That's why he didn't remember the curse. Hearing the words of Queen Madayanti, Nripashrostha became very confused. 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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