vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 180: पुलस्त्य आदि महर्षियोंके समझानेसे पराशरजीके द्वारा राक्षससत्रकी समाप्ति
»
श्लोक 9
श्लोक
1.180.9
तथा पुलस्त्य: पुलह: क्रतुश्चैव महाक्रतु:।
तत्राजग्मुरमित्रघ्न रक्षसां जीवितेप्सया॥ ९॥
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले अर्जुन! इसी प्रकार पुलस्त्य, पुलह, क्रतु और महाक्रुतु भी राक्षसों के प्राण बचाने के लिए वहाँ प्रकट हुए॥9॥
Arjun, destroyer of enemies! Similarly, Pulastya, Pulah, Kratu and Mahakratu also appeared there to save the lives of the demons. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×