vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 180: पुलस्त्य आदि महर्षियोंके समझानेसे पराशरजीके द्वारा राक्षससत्रकी समाप्ति
»
श्लोक 7
श्लोक
1.180.7
तं वसिष्ठादय: सर्वे मुनयस्तत्र मेनिरे।
तेजसा दीप्यमानं वै द्वितीयमिव भास्करम्॥ ७॥
अनुवाद
उस समय वशिष्ठ आदि सभी ऋषिगण तथा तेजस्वी महर्षि पराशर द्वितीय सूर्य के समान प्रकट हुए॥7॥
At that time, all the sages like Vashishtha and the brightly shining Maharishi Parashar appeared like the second sun. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×