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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 180: पुलस्त्य आदि महर्षियोंके समझानेसे पराशरजीके द्वारा राक्षससत्रकी समाप्ति
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श्लोक 4
श्लोक
1.180.4
न हि तं वारयामास वसिष्ठो रक्षसां वधात्।
द्वितीयामस्य मा भाङ्क्षं प्रतिज्ञामिति निश्चयात्॥ ४॥
अनुवाद
उस समय महर्षि वसिष्ठ ने यह सोचकर कि कहीं यह अपनी दूसरी प्रतिज्ञा न तोड़ दे, उसे राक्षसों का वध करने से नहीं रोका ॥4॥
At that time Maharishi Vasishtha, thinking that he should not break his second vow, did not stop him from killing the demons. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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