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mahabharat 1.180.22: समस्त राक्षसों के नाश के अनुष्ठान के लिए जो अग्नि एकत्रित की गई थी, उसे उत्तर दिशा में हिमालय के चारों ओर के विशाल वन में छोड़ दिया गया॥22॥   |   mahabharat अध्याय 1.180: पुलस्त्य आदि महर्षियोंके समझानेसे पराशरजीके द्वारा राक्षससत्रकी समाप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 180: पुलस्त्य आदि महर्षियोंके समझानेसे पराशरजीके द्वारा राक्षससत्रकी समाप्ति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.180.22 
सर्वराक्षससत्राय सम्भृतं पावकं तदा।
उत्तरे हिमवत्पार्श्वे उत्ससर्ज महावने॥ २२॥
 
 
अनुवाद
समस्त राक्षसों के नाश के अनुष्ठान के लिए जो अग्नि एकत्रित की गई थी, उसे उत्तर दिशा में हिमालय के चारों ओर के विशाल वन में छोड़ दिया गया॥22॥
 
The fire that had been collected for the ritual of destruction of all demons was left in the vast forest around the Himalayas in the north.॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)