श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 180: पुलस्त्य आदि महर्षियोंके समझानेसे पराशरजीके द्वारा राक्षससत्रकी समाप्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.180.21 
गन्धर्व उवाच
एवमुक्त: पुलस्त्येन वसिष्ठेन च धीमता।
तदा समापयामास सत्रं शाक्तो महामुनि:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
गंधर्व कहते हैं- अर्जुन! पुलस्त्यजी तथा परम बुद्धिमान वशिष्ठजी की सलाह पर शक्तिपुत्र महर्षि पराशर ने उसी क्षण यज्ञ समाप्त कर दिया। 21॥
 
Gandharva says- Arjun! On the advice of Pulastyaji and the most intelligent Vashishthaji, the great sage Parashar, the son of Shakti, ended the yagya at that very moment. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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