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mahabharat 1.178.2: हे पुत्रो! यह तो स्पष्ट है कि इस महाबली बालक ने तुम्हारे द्वारा मारे गए अपने स्वजनों को स्मरण करके क्रोधवश तुम्हारे नेत्र छीन लिए हैं; इसमें संशय नहीं है॥2॥   |   mahabharat अध्याय 1.178: पितरोंद्वारा और्वके क्रोधका निवारण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 178: पितरोंद्वारा और्वके क्रोधका निवारण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.178.2 
तेन चक्षूंषि वस्ताता व्यक्तं कोपान्महात्मना।
स्मरता निहतान् बन्धूनादत्तानि न संशय:॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे पुत्रो! यह तो स्पष्ट है कि इस महाबली बालक ने तुम्हारे द्वारा मारे गए अपने स्वजनों को स्मरण करके क्रोधवश तुम्हारे नेत्र छीन लिए हैं; इसमें संशय नहीं है॥2॥
 
Sons! It is quite clear that this great child, remembering his relatives killed by you, has taken away your eyes out of anger; there is no doubt about this.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)