| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 178: पितरोंद्वारा और्वके क्रोधका निवारण » श्लोक 13 |
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| | | | श्लोक 1.178.13  | ततस्तं पितरस्तात विज्ञाय कुलनन्दनम्।
पितृलोकादुपागम्य सर्व ऊचुरिदं वच:॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | तत्पश्चात्, अपने वंश के सुख के कारण और्व मुनि का यह निश्चय जानकर समस्त पितर पितृलोक से आये और उन्होंने यह बात कही ॥13॥ | | | | Thereafter, all the Pitrs, knowing about the resolve of Aurva Muni, who was the source of happiness for their lineage, came from Pitriloka and said this. ॥ 13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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