श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 178: पितरोंद्वारा और्वके क्रोधका निवारण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.178.10 
स चक्रे तात लोकानां विनाशाय महामना:।
सर्वेषामेव कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन मन: प्रवणमात्मन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वत्स पराशर! उन महामुनि ने सम्पूर्ण लोकों के विनाश का मन बना लिया ॥10॥
 
Vatsa Parashar! That great sage set his mind towards the complete destruction of all the worlds. 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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