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mahabharat 1.176.6: तब ऋषि बंधनों से मुक्त होकर जल से बाहर आए और उस नदी का नाम 'विपाशा' (व्यास) रखा।   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.176.6 
उत्ततार तत: पाशैर्विमुक्त: स महानृषि:।
विपाशेति च नामास्या नद्याश्चक्रे महानृषि:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तब ऋषि बंधनों से मुक्त होकर जल से बाहर आए और उस नदी का नाम 'विपाशा' (व्यास) रखा।
 
Then the sage came out of the water free from the bonds and named that river 'Vipasha' (Vyas).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)