ऋतावथ महर्षि: स सम्बभूव तया सह।
देव्या दिव्येन विधिना वसिष्ठ: श्रेष्ठभागृषि:॥ ४४॥
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान् के भक्त महर्षि वशिष्ठ ने ऋतुकाल में शास्त्रविधि से विधिपूर्वक रानी के साथ नियोग किया॥44॥
After that, Maharishi Vashishtha, a devotee of God, performed Niyoga with the queen according to the supernatural method of the scriptures during the season. 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥