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तत: प्रविष्टे राजर्षौ तस्मिंस्तत् पुरमुत्तमम्।
राज्ञस्तस्याज्ञया देवी वसिष्ठमुपचक्रमे॥ ४३॥
अनुवाद
राजर्षि कल्माषपाद के उस महान नगर में प्रवेश करने के पश्चात् उक्त महाराज की आज्ञा से रानी (मदयन्ती) महर्षि वसिष्ठजी के समीप गयीं ॥43॥
After the entry of Rajarishi Kalmashpada into that great city, as per the order of the said Maharaj, Queen (Madayanti) went near Maharishi Vasisthaji. 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥