श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.176.4 
तत: पाशैस्तदाऽऽत्मानं गाढं बद्‍ध्वा महामुनि:।
तस्या जले महानद्या निममज्ज सुदु:खित:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तब महर्षि वसिष्ठ ने अत्यन्त दुःखी होकर अपने शरीर को पाशों से कसकर बाँध लिया और उस महान नदी के जल में कूद पड़े।
 
Then the great sage Vasishtha, greatly saddened, tied up his body tightly with nooses and jumped into the water of that great river.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)