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mahabharat 1.176.38-39: कई वर्षों के पश्चात् राजा ने प्रसिद्ध ऋषि वशिष्ठ के साथ उस पवित्र नगरी में प्रवेश किया। अयोध्यावासियों ने राजा कल्माषपाद को पुरोहित सहित उसी प्रकार देखा, जैसे लोग प्रातःकाल उगते हुए सूर्य को देखते हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  1.176.38-39 
सुचिराय मनुष्येन्द्रो नगरीं पुण्यलक्षणाम्।
विवेश सहितस्तेन वसिष्ठेन महर्षिणा॥ ३८॥
ददृशुस्तं महीपालमयोध्यावासिनो जना:।
पुरोहितेन सहितं दिवाकरमिवोदितम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
कई वर्षों के पश्चात् राजा ने प्रसिद्ध ऋषि वशिष्ठ के साथ उस पवित्र नगरी में प्रवेश किया। अयोध्यावासियों ने राजा कल्माषपाद को पुरोहित सहित उसी प्रकार देखा, जैसे लोग प्रातःकाल उगते हुए सूर्य को देखते हैं।
 
After many years, the king entered that holy city accompanied by the famous sage Vasishtha. The people of Ayodhya saw King Kalmasapada accompanied by the priest in the same way as the people see the rising Sun (in the morning).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)