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mahabharat 1.176.34: साधुशिरोमणि! इक्ष्वाकु वंश की वृद्धि के लिए आप मुझे ऐसी इच्छित संतान प्रदान करें, जो उत्तम स्वभाव, सुन्दर रूप और उत्तम गुणों से युक्त हो॥34॥   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.176.34 
अपत्यमीप्सितं मह्यं दातुमर्हसि सत्तम।
शीलरूपगुणोपेतमिक्ष्वाकुकुलवृद्धये॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
साधुशिरोमणि! इक्ष्वाकु वंश की वृद्धि के लिए आप मुझे ऐसी इच्छित संतान प्रदान करें, जो उत्तम स्वभाव, सुन्दर रूप और उत्तम गुणों से युक्त हो॥34॥
 
Sadhushiromane! For the growth of Ikshvaku dynasty, please give me such a desired child, who is full of good nature, beautiful appearance and excellent qualities. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)