Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.176.33: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ, हे वेदों के विद्वानों में श्रेष्ठ! मैं आपसे एक पुत्र प्राप्त करना चाहता हूँ, जिसके द्वारा मैं अपने इक्ष्वाकु वंश के पूर्वजों का ऋण चुका सकूँ।   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.176.33 
इक्ष्वाकूणां च येनाहमनृण: स्यां द्विजोत्तम।
तत् त्वत्त: प्राप्तुमिच्छामि सर्ववेदविदां वर॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ, हे वेदों के विद्वानों में श्रेष्ठ! मैं आपसे एक पुत्र प्राप्त करना चाहता हूँ, जिसके द्वारा मैं अपने इक्ष्वाकु वंश के पूर्वजों का ऋण चुका सकूँ।
 
O best of the Brahmins, foremost among all the scholars of the Vedas! I wish to have a son from you, by whom I may repay the debt of my forefathers belonging to the Ikshvaku lineage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)