Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.176.3: हे कौरवपुत्र! (उसे देखकर) शोक से भरे हुए वसिष्ठजी के मन में फिर यह विचार आया कि मुझे इस नदी के जल में डूब मरना चाहिए॥3॥ | mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कौरवपुत्र! (उसे देखकर) शोक से भरे हुए वसिष्ठजी के मन में फिर यह विचार आया कि मुझे इस नदी के जल में डूब मरना चाहिए॥3॥
O son of Kauravas! (On seeing him) the thought came again in the mind of Vasishtha, filled with grief, that I should drown myself in the water of this river.॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥