Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.176.28: मन्त्रयुक्त जल के प्रभाव से राक्षस भी राजा को छोड़कर चला गया। फिर जैसे सूर्यदेव अपनी किरणों से संध्या के बादलों को रंजित कर देते हैं, वैसे ही राजा ने अपने प्राकृतिक तेज से उस विशाल वन को रंजित कर दिया। | mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन्त्रयुक्त जल के प्रभाव से राक्षस भी राजा को छोड़कर चला गया। फिर जैसे सूर्यदेव अपनी किरणों से संध्या के बादलों को रंजित कर देते हैं, वैसे ही राजा ने अपने प्राकृतिक तेज से उस विशाल वन को रंजित कर दिया।
The demon also left the king due to the effect of the water infused with the mantra. Then just as the Sun God colours the evening clouds with his rays, the king coloured that great forest with his natural brilliance.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥