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mahabharat 1.176.22: 'प्रभु! इस पापी से मेरी रक्षा कीजिए, जो अत्यंत भयानक दिखाई देता है। निश्चय ही यह राक्षस हम दोनों को खाने के लिए यहाँ घात लगाए बैठा है।' 22॥   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.176.22 
पाहि मां भगवन् पापादस्माद् दारुणदर्शनात्।
राक्षसोऽयमिहात्तुं वै नूनमावां समीहते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
'प्रभु! इस पापी से मेरी रक्षा कीजिए, जो अत्यंत भयानक दिखाई देता है। निश्चय ही यह राक्षस हम दोनों को खाने के लिए यहाँ घात लगाए बैठा है।' 22॥
 
'Lord! Please protect me from this sinner who looks very terrible. Surely this monster is waiting here to eat both of us. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)