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mahabharat 1.176.21: महाभाग! आप समस्त वेद विद्वानों में श्रेष्ठ हैं। (इस समय) इस पृथ्वी पर आपके अतिरिक्त कोई ऐसा नहीं है जो उस राक्षस की गति को रोक सके॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.176.21 
तं निवारयितुं शक्तो नान्योऽस्ति भुवि कश्चन।
त्वदृतेऽद्य महाभाग सर्ववेदविदां वर॥ २१॥
 
 
अनुवाद
महाभाग! आप समस्त वेद विद्वानों में श्रेष्ठ हैं। (इस समय) इस पृथ्वी पर आपके अतिरिक्त कोई ऐसा नहीं है जो उस राक्षस की गति को रोक सके॥ 21॥
 
‘Mahabhag! You are the best among all the Ved scholars. (At this time) there is no one else on this earth except you who can stop the pace of that demon.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)