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mahabharat 1.176.20: हे प्रभु! वह भयंकर राक्षस लकड़ी का एक बड़ा लट्ठा लिए हुए इधर आ रहा है, मानो मृत्यु का देवता स्वयं कोई भयंकर दण्ड लेकर आ रहा हो।   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.176.20 
असौ मृत्युरिवोग्रेण दण्डेन भगवन्नित:।
प्रगृहीतेन काष्ठेन राक्षसोऽभ्येति दारुण:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! वह भयंकर राक्षस लकड़ी का एक बड़ा लट्ठा लिए हुए इधर आ रहा है, मानो मृत्यु का देवता स्वयं कोई भयंकर दण्ड लेकर आ रहा हो।
 
'O Lord! That horrible demon is coming this way carrying a huge log of wood, as if the Lord of death himself is coming with a terrible punishment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)