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mahabharat 1.176.12: ऋषि के पीछे से उन्हें किसी के द्वारा छह भागों से युक्त तथा स्पष्ट अर्थ वाले वैदिक मंत्रों का व्यवस्थित ढंग से अध्ययन करने की ध्वनि सुनाई दी।   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.176.12 
अथ शुश्राव संगत्या वेदाध्ययननि:स्वनम्।
पृष्ठत: परिपूर्णार्थं षङ्‍‍भिरङ्गैरलंकृतम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
ऋषि के पीछे से उन्हें किसी के द्वारा छह भागों से युक्त तथा स्पष्ट अर्थ वाले वैदिक मंत्रों का व्यवस्थित ढंग से अध्ययन करने की ध्वनि सुनाई दी।
 
From behind the sage he heard the sound of someone studying the Vedic mantras, decorated with six parts and having clear meanings, in a systematic manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)