| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक » श्लोक 9 |
|
| | | | श्लोक 1.175.9  | एवं परस्परं तौ तु पथोऽर्थं वाक्यमूचतु:।
अपसर्पापसर्पेति वागुत्तरमकुर्वताम्॥ ९॥ | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार वे दोनों मार्ग के लिए आपस में झगड़ने लगे। एक कहता, ‘तुम चलो’, दूसरा कहता, ‘नहीं, तुम चलो।’ इस प्रकार वे उत्तर देने लगे॥9॥ | | | | In this way, both of them started fighting with each other for the path. One would say, 'You move', the other would say, 'No, you move.' In this way, they started giving answers.॥ 9॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|