Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.175.7: उन्हें देखकर राजा ने कहा, ‘हमारे मार्ग से हट जाओ।’ तब ऋषि शक्ति ने उन्हें मधुर वचनों में समझाते हुए कहा -॥7॥   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.175.7 
अपगच्छ पथोऽस्माकमित्येवं पार्थिवोऽब्रवीत्।
तथा ऋषिरुवाचैनं सान्त्वयञ्श्लक्ष्णया गिरा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उन्हें देखकर राजा ने कहा, ‘हमारे मार्ग से हट जाओ।’ तब ऋषि शक्ति ने उन्हें मधुर वचनों में समझाते हुए कहा -॥7॥
 
Seeing them the king said, 'Get out of our way.' Then the sage Shakti explained to them in sweet words, saying -॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)