Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.175.48: तब महर्षि वशिष्ठ ने शोक से अभिभूत होकर, समुद्र को सामने देखकर, एक विशाल शिला अपने गले में बांध ली और तुरंत जल में कूद पड़े।   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  1.175.48 
स समुद्रमभिप्रेक्ष्य शोकाविष्टो महामुनि:।
बद्‍ध्वा कण्ठे शिलां गुर्वीं निपपात तदाम्भसि॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
तब महर्षि वशिष्ठ ने शोक से अभिभूत होकर, समुद्र को सामने देखकर, एक विशाल शिला अपने गले में बांध ली और तुरंत जल में कूद पड़े।
 
Then the great sage Vasishtha, overcome with grief, seeing the ocean in front of him, tied a huge rock around his neck and immediately jumped into the water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)