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mahabharat 1.175.46: पाण्डुनन्दन! जब (इस प्रकार) गिरने पर भी वह नहीं मरा, तब भगवान वशिष्ठ ने उस महान् वन के भीतर प्रज्वलित वन में प्रवेश किया॥46॥   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.175.46 
न ममार च पातेन स यदा तेन पाण्डव।
तदाग्निमिद्धं भगवान् संविवेश महावने॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुनन्दन! जब (इस प्रकार) गिरने पर भी वह नहीं मरा, तब भगवान वशिष्ठ ने उस महान् वन के भीतर प्रज्वलित वन में प्रवेश किया॥46॥
 
Pandunandan! When he did not die even after falling (like this), then Lord Vashishtha entered the blazing forest within the great forest. 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)