Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.175.45: महर्षि वसिष्ठ ने मेरु पर्वत की चोटी से उसी पर्वत की एक चट्टान पर अपने को फेंका; परन्तु ऐसा लगा मानो वे रुई के ढेर पर गिर पड़े हों ॥ 45॥ | mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स मेरुकूटादात्मानं मुमोच भगवानृषि:।
गिरेस्तस्य शिलायां तु तूलराशाविवापतत्॥ ४५॥
अनुवाद
महर्षि वसिष्ठ ने मेरु पर्वत की चोटी से उसी पर्वत की एक चट्टान पर अपने को फेंका; परन्तु ऐसा लगा मानो वे रुई के ढेर पर गिर पड़े हों ॥ 45॥
The great sage Vasishtha threw himself from the peak of Mount Meru onto a rock on the same mountain; but it felt as if he had fallen on a heap of cotton. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥