श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.175.38 
तत: स नृपतिश्रेष्ठो रक्षसापहृतेन्द्रिय:।
उवाच शक्तिं तं दृष्ट्वा न चिरादिव भारत॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
भरत! उस राक्षस ने राजा के मन और इन्द्रियों को अपने वश में कर लिया था, अतः कुछ दिनों के पश्चात् उस महाबली राजा ने पूर्वोक्त शक्ति ऋषि को अपने सामने देखकर कहा -॥38॥
 
Bhaarat! The demon had taken control of the king's mind and senses, so after a few days that great king saw the aforesaid Shakti sage in front of him and said -॥ 38॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas