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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.175.36 
सक्तो मानुषमांसेषु यथोक्त: शक्तिना तथा।
उद्वेजनीयो भूतानां चरिष्यति महीमिमाम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जैसा कि शक्ति मुनि ने कहा है, वह मनुष्यों के मांस में आसक्त होगा और समस्त जीवों के लिए उत्साह का स्रोत बनकर इस पृथ्वी पर विचरण करेगा ॥36॥
 
As Shakti Muni has said, he will be attached to the flesh of humans and will wander on this earth becoming the source of excitement for all living beings. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)