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mahabharat 1.175.32: तब रसोइया 'ऐसा ही हो' कहकर कसाईखाने में जल्लादों के घर गया और बिना किसी भय के तुरन्त मनुष्य का मांस ले आया। 32.   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  1.175.32 
तथेत्युक्त्वा तत: सूद: संस्थानं वध्यघातिनाम्।
गत्वाऽऽजहार त्वरितो नरमांसमपेतभी:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
तब रसोइया 'ऐसा ही हो' कहकर कसाईखाने में जल्लादों के घर गया और बिना किसी भय के तुरन्त मनुष्य का मांस ले आया। 32.
 
Then the cook, saying 'So be it', went to the house of the executioners at the slaughterhouse and without any fear brought human flesh immediately. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)