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mahabharat 1.175.30: गंधर्व कहते हैं - उनके ऐसा कहने पर रसोइये ने मांस की खोज की; परंतु जब उसे कहीं भी मांस नहीं मिला तो वह दुखी हो गया और उसने राजा को यह बात बताई।   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.175.30 
गन्धर्व उवाच
एवमुक्तस्तत: सूद: सोऽनासाद्यामिषं क्वचित्।
निवेदयामास तदा तस्मै राज्ञे व्यथान्वित:॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
गंधर्व कहते हैं - उनके ऐसा कहने पर रसोइये ने मांस की खोज की; परंतु जब उसे कहीं भी मांस नहीं मिला तो वह दुखी हो गया और उसने राजा को यह बात बताई।
 
Gandharva says - Upon his saying this, the cook searched for meat; but when he could not find meat anywhere, he became sad and informed the king about it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)