Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.175.3: उस अत्यंत भयानक वन में उसने अनेक गैंडों को भी मार डाला। जब राजा बहुत दिनों तक हिंसक पशुओं को मारते-मारते थक गया, तो वह नगर में लौट आया। | mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्मिन् वने महाघोरे खड्गांश्च बहुशोऽहनत्।
हत्वा च सुचिरं श्रान्तो राजा निववृते तत:॥ ३॥
अनुवाद
उस अत्यंत भयानक वन में उसने अनेक गैंडों को भी मार डाला। जब राजा बहुत दिनों तक हिंसक पशुओं को मारते-मारते थक गया, तो वह नगर में लौट आया।
In that extremely dreadful forest he also killed many rhinoceroses. When the king got tired after killing ferocious animals for a long time, he returned to the city.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥