श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.175.24 
ददर्शाथ द्विज: कश्चिद् राजानं प्रस्थितं वनम्।
अयाचत क्षुधापन्न: समांसं भोजनं तदा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
एक दिन एक ब्राह्मण ने राक्षसग्रस्त राजा को वन की ओर जाते देखा और बहुत भूख लगने पर उससे मांस सहित भोजन माँगा॥ 24॥
 
One day a Brahmin saw the King (possessed by a demon) going towards the forest and being very hungry, he asked him for food along with meat.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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