श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.175.2 
स कदाचिद् वनं राजा मृगयां निर्ययौ पुरात्।
मृगान् विध्यन् वराहांश्च चचार रिपुमर्दन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
एक दिन वह नगर छोड़कर हिंसक पशुओं को मारने के लिए वन में चला गया। वहाँ वह रिपुमर्दन राजा सूअर आदि हिंसक पशुओं को मारता हुआ इधर-उधर भटकने लगा॥2॥
 
One day he left the city and went to the forest to kill ferocious animals. There he started wandering here and there killing Ripumardana King boars and other ferocious animals.॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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