श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक d10
 
 
श्लोक  1.174.d10 
वसिष्ठ उवाच
निर्जितोऽसि महाराज दुरात्मन् गाधिनन्दन।
यदि तेऽस्ति परं शौर्यं तद् दर्शय मयि स्थिते॥
 
 
अनुवाद
वशिष्ठजी बोले- महाराज, हे दुष्टात्मा गाधिनन्दन! अब तुम परास्त हो गए। यदि तुममें और भी बड़ा साहस है, तो मुझ पर दिखाओ। मैं तुम्हारे सामने दृढ़तापूर्वक खड़ा हूँ।
 
Vasishthaji said- Maharaj, you evil-atma Gadhinandan! Now you are defeated. If you have even more great courage, then show it on me. I am standing firmly in front of you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)