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mahabharat 1.174.39-40: उनके द्वारा रची गई नाना प्रकार के म्लेच्छगणों की विशाल सेनाएँ नाना प्रकार के कवच आदि से आच्छादित थीं। सभी ने नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए थे और सभी सैनिक क्रोध से भरे हुए थे। उन्होंने विश्वामित्र की सेना को उनके सामने ही तितर-बितर कर दिया। विश्वामित्र के प्रत्येक सैनिक को म्लेच्छ सेना के पाँच-सात योद्धाओं ने घेर रखा था। 39-40।   |   mahabharat अध्याय 1.174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  1.174.39-40 
तैर्विसृष्टैर्महासैन्यैर्नानाम्लेच्छगणैस्तदा ।
नानावरणसंच्छन्नैर्नानायुधधरैस्तथा॥ ३९॥
अवाकीर्यत संरब्धैर्विश्वामित्रस्य पश्यत:।
एकैकश्च तदा योध: पञ्चभि: सप्तभिर्वृत:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उनके द्वारा रची गई नाना प्रकार के म्लेच्छगणों की विशाल सेनाएँ नाना प्रकार के कवच आदि से आच्छादित थीं। सभी ने नाना प्रकार के अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए थे और सभी सैनिक क्रोध से भरे हुए थे। उन्होंने विश्वामित्र की सेना को उनके सामने ही तितर-बितर कर दिया। विश्वामित्र के प्रत्येक सैनिक को म्लेच्छ सेना के पाँच-सात योद्धाओं ने घेर रखा था। 39-40।
 
The huge armies of various types of mlechhaganas created by him were covered with various types of armour etc. Everyone was wearing different types of weapons and all the soldiers were filled with anger. They scattered Vishwamitra's army in front of him. Each soldier of Vishwamitra was surrounded by five to seven warriors of the mlechha army. 39-40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)