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mahabharat 1.174.31: वसिष्ठ बोले, "कल्याणी! मैं तुम्हें त्याग नहीं रहा हूँ। यदि तुम यहाँ रह सकती हो, तो यहीं रहो। तुम्हारे बछड़े को बलपूर्वक एक मजबूत रस्सी से बाँधकर ले जाया जा रहा है।"   |   mahabharat अध्याय 1.174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.174.31 
वसिष्ठ उवाच
न त्वां त्यजामि कल्याणि स्थीयतां यदि शक्यते।
दृढेन दाम्ना बद्‍ध्वैष वत्सस्ते ह्रियते बलात्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वसिष्ठ बोले, "कल्याणी! मैं तुम्हें त्याग नहीं रहा हूँ। यदि तुम यहाँ रह सकती हो, तो यहीं रहो। तुम्हारे बछड़े को बलपूर्वक एक मजबूत रस्सी से बाँधकर ले जाया जा रहा है।"
 
Vasishtha said, "Kalyani! I am not abandoning you. If you can stay here, stay here. Your calf is being forcibly taken away tied with a strong rope." 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)