गन्धर्व कहते हैं- अर्जुन! नन्दिनी इस प्रकार अपमानित होकर करुण क्रन्दन कर रही थी, फिर भी व्रत का पालन करने वाले महर्षि वशिष्ठजी न तो क्रोधित हुए और न उनका धैर्य डगमगाया॥28॥
Gandharva says- Arjun! Nandini was thus insulted and was crying pitifully, yet the great sage Vashishtha, who strictly observed the fast, neither got angry nor wavered in his patience. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥