श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.174.26 
गन्धर्व उवाच
सा भयान्नन्दिनी तेषां बलानां भरतर्षभ।
विश्वामित्रभयोद्विग्ना वसिष्ठं समुपागमत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
गंधर्व कहते हैं- भरतवंशशिरोमणि! विश्वामित्र के भय से नन्दिनी व्याकुल हो गई थी। उनके सैनिकों के भय से उसने वशिष्ठ ऋषि की शरण ली। 26॥
 
Gandharva says – Bharatvanshshiromane! Nandini was disturbed by the fear of Vishwamitra. Due to fear of their soldiers, she took refuge in sage Vashishtha. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)