Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.173.5-6: गंधर्व बोले - वशिष्ठजी ब्रह्माजी के मानस पुत्र हैं। उनकी पत्नी का नाम अरुन्धती है। वे दो शत्रु - काम और क्रोध, जिन्हें देवता भी कभी नहीं जीत सके, वशिष्ठजी की तपस्या से सदा के लिए पराजित हो गए हैं और सदा उनके चरण दबाते रहते हैं। इन्द्रियों को वश में रखने के कारण ही वे वशिष्ठ कहलाते हैं। 5-6॥ | mahabharat अध्याय 1.173: गन्धर्वका वसिष्ठजीकी महत्ता बताते हुए किसी श्रेष्ठ ब्राह्मणको पुरोहित बनानेके लिये आग्रह करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गंधर्व बोले - वशिष्ठजी ब्रह्माजी के मानस पुत्र हैं। उनकी पत्नी का नाम अरुन्धती है। वे दो शत्रु - काम और क्रोध, जिन्हें देवता भी कभी नहीं जीत सके, वशिष्ठजी की तपस्या से सदा के लिए पराजित हो गए हैं और सदा उनके चरण दबाते रहते हैं। इन्द्रियों को वश में रखने के कारण ही वे वशिष्ठ कहलाते हैं। 5-6॥
Gandharva said – Vashishthaji is the mental son of Brahmaji. His wife's name is Arundhati. Those two enemies, lust and anger, whom even the gods could never conquer, have been defeated forever by the penance of Vasishthaji and have been pressing his feet forever. Because of controlling the senses, he is called Vasishtha. 5-6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥