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mahabharat 1.173.15: पृथ्वी पर विजय प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले राजा के लिए उचित है कि वह अपने समक्ष ब्राह्मण को रखे; अतः सदाचारी, जितेन्द्रिय, वेदों का अभ्यासी, विद्वान् तथा धर्म, कर्म और अर्थ में निपुण ब्राह्मण को ही अपना पुरोहित बनाए॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.173: गन्धर्वका वसिष्ठजीकी महत्ता बताते हुए किसी श्रेष्ठ ब्राह्मणको पुरोहित बनानेके लिये आग्रह करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 173: गन्धर्वका वसिष्ठजीकी महत्ता बताते हुए किसी श्रेष्ठ ब्राह्मणको पुरोहित बनानेके लिये आग्रह करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.173.15 
महीं जिगीषता राज्ञा ब्रह्मकार्यं पुरस्सरम्।
तस्मात् पुरोहित: कश्चिद् गुणवान् विजितेन्द्रिय:।
विद्वान् भवतु वो विप्रो धर्मकामार्थतत्त्ववित्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी पर विजय प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले राजा के लिए उचित है कि वह अपने समक्ष ब्राह्मण को रखे; अतः सदाचारी, जितेन्द्रिय, वेदों का अभ्यासी, विद्वान् तथा धर्म, कर्म और अर्थ में निपुण ब्राह्मण को ही अपना पुरोहित बनाए॥15॥
 
It is appropriate for a king who wishes to conquer the earth to keep a Brahmin in front of him; Therefore, let a virtuous Brahmin, a Jitendriya, a practitioner of the Vedas, a scholar and an expert in religion, work and wealth, be your priest. 15॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि चैत्ररथपर्वणि पुरोहितकरणकथने त्रिसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत चैत्ररथपर्वमें पुरोहित बनानेके लिये कथनसम्बन्धी एक सौ तिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)