Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.172.d1-d3: तब वशिष्ठजी बोले - जो अजन्मा हैं, तीनों लोकों को पवित्र करने वाले हैं, समस्त प्राणियों के अंतःकरण के स्वामी हैं, किरणों के अधिपति हैं, धर्म के स्वरूप हैं, सृष्टि और संहार के अधिष्ठाता हैं तथा परम दयालु देवताओं में श्रेष्ठ हैं, उन भगवान सूर्य को नमस्कार है। जो ज्ञानियों के अंतर्यामी, जगत के प्रकाशक, जगत के हितैषी, स्वयंभू और सहस्रों तेजयुक्त नेत्रों से सुशोभित हैं, उन अनंत तेजस्वी और सुंदर भगवान सूर्य को नमस्कार है। जो जगत के एकमात्र नेत्र हैं, जो जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार के लिए उत्तरदायी हैं, जिनके स्वरूप ही तीनों वेद हैं, जो त्रिगुण रूप धारण करके ब्रह्मा, विष्णु और शिव नाम से विख्यात हैं, उन भगवान सविता को नमस्कार है। | mahabharat अध्याय 1.172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब वशिष्ठजी बोले - जो अजन्मा हैं, तीनों लोकों को पवित्र करने वाले हैं, समस्त प्राणियों के अंतःकरण के स्वामी हैं, किरणों के अधिपति हैं, धर्म के स्वरूप हैं, सृष्टि और संहार के अधिष्ठाता हैं तथा परम दयालु देवताओं में श्रेष्ठ हैं, उन भगवान सूर्य को नमस्कार है। जो ज्ञानियों के अंतर्यामी, जगत के प्रकाशक, जगत के हितैषी, स्वयंभू और सहस्रों तेजयुक्त नेत्रों से सुशोभित हैं, उन अनंत तेजस्वी और सुंदर भगवान सूर्य को नमस्कार है। जो जगत के एकमात्र नेत्र हैं, जो जगत की उत्पत्ति, पालन और संहार के लिए उत्तरदायी हैं, जिनके स्वरूप ही तीनों वेद हैं, जो त्रिगुण रूप धारण करके ब्रह्मा, विष्णु और शिव नाम से विख्यात हैं, उन भगवान सविता को नमस्कार है।
Then Vashishthaji said - Salutations to Lord Surya who is unborn, the one who purifies the three worlds, the intercessor of all living beings, the ruler of the rays, the embodiment of religion, the presiding deity of creation and destruction and the best among the most merciful gods. Salutations to the infinitely bright and beautiful Lord Surya who is the inner soul of the wise, the illuminator of the world, the well-wisher of the world, the self-sufficient and adorned with thousands of bright eyes. Salutations to Lord Savita, who is the only eye of the world, who is responsible for the creation, maintenance and destruction of the world, whose form is the three Vedas, who is famous by the names Brahma, Vishnu and Shiva by assuming the triple form.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥