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mahabharat 1.172.37: वह अपनी पत्नी के साथ उसी पर्वत के वन-उपवनों में बारह वर्षों तक उसी प्रकार सुख भोगता रहा ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 1.172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.172.37 
ततो द्वादश वर्षाणि काननेषु वनेषु च।
रेमे तस्मिन् गिरौ राजा तथैव सह भार्यया॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वह अपनी पत्नी के साथ उसी पर्वत के वन-उपवनों में बारह वर्षों तक उसी प्रकार सुख भोगता रहा ॥37॥
 
He continued to enjoy the same pleasure with his wife in the forests and groves of the same mountain for twelve years. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)