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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 172: वसिष्ठजीकी सहायतासे राजा संवरणको तपतीकी प्राप्ति  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.172.36 
नृपतिं त्वभ्यनुज्ञाप्य वसिष्ठोऽथापचक्रमे।
सोऽथ राजा गिरौ तस्मिन् विजहारामरो यथा॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वसिष्ठ भी राजा से विदा लेकर अपने स्थान पर चले गए और राजा संवरण उस पर्वत पर देवता की भांति रहने लगे।
 
Vasishtha also took leave from the king and went to his place. Thereafter king Samvaran started living on that mountain like a deity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)